हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामनेई (र) ने अरफ़ा के दिन रोज़ा रखन के संबंध में एक प्रश्न का उत्तर दिया है। शरई अहकाम मे रूचि रखने वालो के लिए पूछे गए प्रश्न और उसके उत्तर का पाठ प्रस्तुत हैः
अरफ़ा के दिन रोज़ा रखना
प्रश्न: क्या अरफ़ा के दिन रोज़ा रखना मुस्तहब है?
उत्तर: निम्नलिखित रोज़े :
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आशूरा के दिन का रोज़ा
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मेज़बान की अनुमति के बिना मेहमान का मुस्तहब रोज़ा
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पिता की अनुमति के बिना बच्चे का मुस्तहब रोज़ा
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अरफ़ा के दिन का रोज़ा उस व्यक्ति के लिए जो उसे दुआ पढ़ने से रोक दे
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जिस दिन व्यक्ति को संदेह हो कि यह अरफ़ा का दिन है या ईद-उल-अज़हा का – ऐसे दिन का रोज़ा मकरूह है।
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