हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, आयतुल्लाह मकारिम शिराज़ी ने हैवी डिपोज़िट पर घर के किराय से संबंधित एक सवाल का जवाब दिया है। शरई मसाइल मे रुचि रखने वालो के लिए पूछे गए सवाल और उसके जवाब का पाठ प्रस्तुत हैः
सवाल: लोगों में यह प्रचलित है कि वे घर किराए पर लेने के लिए मालिक को शुरुआत में केवल हैवी डिपोज़िट देते हैं और उसके बाद कोई किराया नहीं देते। इसका शरई हुक्म क्या है?
जवाब: कुछ लोगों के बीच यह आम बात है कि वे मकान मालिक को हैवी डिपोज़िट देते और और उसका मकान ले लेते हैं — इस शर्त पर कि वे किराया कम अदा करें या बिल्कुल न दें। इसे 'रहनी घर' कहा जाता है। यह कार्य सूद/ब्याज है और हराम है।
इसका जायज़ तरीका यह है कि पहले मकान मालिक उस व्यक्ति को घर थोड़े से किराए पर दे (चाहे वह रकम कम ही क्यों न हो) — फिर किराए के अनुबंध (एगरीमैंट) के अंदर यह शर्त लगा दे कि उसे इतनी रकम कर्ज़ के तौर पर देनी होगी और घर को उसके बदले गिरवी रखना होगा। इस सूरत में सूद / ब्याज नहीं है और यह हलाल है।
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