शनिवार 1 अगस्त 2026 - 03:28
अरबईन-ए-हुसैनी इंसान साज़ी, वैश्विक जागरूकता और अहलेबैत (अ.) की सभ्यता का जीवंत प्रतीक है: मौलाना सय्यद फ़ैज़ान हैदर जवादी

प्रसिद्ध धार्मिक कार्यकर्ता और प्रचारक मौलाना सय्यद फ़ैज़ान हैदर जवादी, इन दिनों अरबीन-ए-हुसैनी के अवसर पर नजफ़ अशरफ़ से कर्बला मौअल्ला तक पैदल यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने नजफ़ से यात्रा के दौरान हौज़ा न्यूज़ के प्रतिनिधि से विशेष बातचीत में कहा कि अरबर्ईन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक वैश्विक सांस्कृतिक और सभ्यतागत आंदोलन है, जो इंसान को अल्लाह, अहलेबैत (अ), समाज और समूची मानवता के साथ अपने संबंध को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान करता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना सय्यद फैज़ान हैदर जवादी इन दिनों अरबर्ईन के अवसर पर नजफ़ अशरफ़ से कर्बला मौअल्ला की ओर पैदल यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अरबर्ईन का सबसे बड़ा संदेश ज्ञान और जागरूकता के साथ जीवन जीना है। इमाम हुसैन (अ) ने मानवता को यह सिखाया कि ईमान तब तक पूर्ण नहीं होता, जब तक उसके साथ दूरदृष्टि, जिम्मेदारी और त्याग शामिल न हो। यही कारण है कि अरबीन की यात्रा लाखों लोगों को आत्ममंथन करने और अपने जीवन के उद्देश्य पर विचार करने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि नजफ़ से कर्बला तक का मार्ग वास्तव में एक जीवंत शिक्षालय है। यहाँ इंसान धैर्य, अनुशासन, सेवा, भाईचारा, सहिष्णुता और दूसरों के सम्मान को केवल पुस्तकों में नहीं, बल्कि व्यवहारिक जीवन में देखता है। जब विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और राष्ट्रीयताओं से जुड़े लोग एक ही उद्देश्य के साथ साथ चलते हैं, तो यह दृश्य इस्लाम की सार्वभौमिक शिक्षाओं का व्यावहारिक परिचय बन जाता है।
मौलाना जवादी ने कहा कि अरबर्ईन ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि अहलेबैत (अ) का विद्यालय केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी मानवता का मार्गदर्शन करने की पूरी क्षमता रखता है। इस महान आयोजन में न किसी जाति को श्रेष्ठता प्राप्त है, न किसी भाषा को और न किसी देश को, बल्कि यहाँ केवल इमाम हुसैन (अ) से प्रेम और मानव सेवा ही श्रेष्ठता का आधार है।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को विशेष रूप से अरबर्ईन से शिक्षा लेने की आवश्यकता है। आधुनिक युग में वैचारिक भ्रम, भौतिकवाद और नैतिक संकट लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे वातावरण में अरबर्ईन युवाओं को जीवन का उद्देश्य, चरित्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी और धार्मिक पहचान का स्पष्ट बोध कराता है। यदि युवा अरबर्ईन के संदेश को समझ लें, तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन के प्रभावशाली प्रतिनिधि बन सकते हैं।
मौलाना जवादी ने कहा कि अरबर्ईन का एक महत्वपूर्ण पहलू दावत और धार्मिक प्रचार भी है। लाखों लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, अपने अनुभव साझा करते हैं और विभिन्न समाजों की समस्याओं पर विचार-विमर्श करते हैं। इस प्रकार अरबर्ईन पूरे इस्लामी जगत के बीच वैचारिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने आगे कहा कि आज पूरी दुनिया संचार माध्यमों और सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। इसलिए अरबर्ईन के वास्तविक संदेश को प्रभावी ढंग से दुनिया तक पहुँचाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। हमें दुनिया को बताना होगा कि यह महान आयोजन नफरत, हिंसा या उग्रवाद का नहीं, बल्कि प्रेम, शांति, त्याग, सेवा और मानवीय सम्मान का सबसे बड़ा प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि जहाँ कहीं भी अत्याचार, शोषण और मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा, वहाँ कर्बला का संदेश जीवित रहेगा। इमाम हुसैन (अ) ने किसी विशेष समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए सत्य और न्याय का परचम बुलंद किया था। इसलिए अरबर्ईन हर स्वतंत्र विचार वाले व्यक्ति को यह एहसास दिलाता है कि अन्याय के विरुद्ध मौन रहना किसी भी सभ्य समाज की पहचान नहीं हो सकती।
उन्होंने अरबर्ईन के ज़ायरों को संबोधित करते हुए कहा कि इस यात्रा को केवल ज़ियारत तक सीमित न रखें, बल्कि इसके बाद भी अपने जीवन में सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, सदाचार, इबादत, मानव सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करें। यदि अरबर्ईन के प्रभाव हमारे दैनिक जीवन, हमारे घरों, समाज और चरित्र में दिखाई दें, तभी इस महान इबादत की वास्तविक सफलता मानी जाएगी।
अंत में मौलाना सय्यद फैज़ान हैदर जवादी ने दुआ की कि अल्लाह तआला सभी ज़ायरों की ज़ियारत को स्वीकार फरमाए, उम्मत-ए-मुस्लिमा में एकता और भाईचारे को बढ़ावा दे, दुनिया के सभी पीड़ितों की सहायता करे और हमें अहलेबैत (अ) के मार्ग पर दृढ़ रहते हुए इमाम हुसैन (अ) के सार्वभौमिक संदेश को दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाने की तौफ़ीक़ प्रदान करे।

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