मंगलवार 1 सितंबर 2026 - 04:58
मरीजों की सेवा और ज़रूरतमंदों की सहायता ही समाज की असली खिदमत हैं।हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद सफ़दर हुसैन ज़ैदी

हौज़ा / हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स.ल.व.और हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स.की विलादत-ए-बासआदत के मुबारक अवसर पर मौलाना सैयद सफ़दर हुसैन ज़ैदी की अगुवाई में सदर अस्पताल पहुँचकर मरीजों के बीच फल वितरित किए गए। इस दौरान मरीजों की कुशलक्षेम पूछी गई और उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ की गई।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , उत्तर प्रदेश के जौनपुर शहर में हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स.ल.व.और हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अ.स.की विलादत-ए-बासआदत के मुबारक अवसर पर मौलाना सैयद सफ़दर हुसैन ज़ैदी (मैनेजर जामिया इमाम जाफर सादिक अलैहिस्सलाम और सदर इमामबाड़ा, जौनपुर)की अगुवाई में सदर अस्पताल पहुँचकर मरीजों के बीच फल वितरित किए गए। इस दौरान मरीजों की कुशलक्षेम पूछी गई और उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ की गई।

मरीजों की सेवा और ज़रूरतमंदों की सहायता ही समाज की असली खिदमत हैं।हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद सफ़दर हुसैन ज़ैदी

यह पहल केवल फल वितरण तक सीमित नहीं, बल्कि इंसानियत, मोहब्बत, भाईचारे और समाज की सेवा का खूबसूरत संदेश भी है। अस्पताल में भर्ती मरीज बीमारी और परेशानी के दौर से गुजर रहे होते हैं। ऐसे समय में किसी का उनके पास जाकर हालचाल पूछना, कुछ पल साथ बिताना और उनके लिए दुआ करना उनके हौसले को बढ़ाता है।

खास तौर पर नौजवान शिया उलमा और समाज के दिलदार लोगों के लिए यह एक प्रेरणादायक कदम है। धार्मिक आयोजनों की खुशियों को केवल सभाओं और महफिलों तक सीमित रखने के बजाय अगर जरूरतमंदों, मरीजों, बुजुर्गों और परेशानहाल लोगों तक पहुँचाया जाए तो इससे धर्म की शिक्षाओं का वास्तविक और सकारात्मक संदेश समाज में जाता है।

मरीजों की सेवा और ज़रूरतमंदों की सहायता ही समाज की असली खिदमत हैं।हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद सफ़दर हुसैन ज़ैदी

मौलाना सफ़दर हुसैन ज़ैदी की इस पहल से यह संदेश मिलता है कि विलादत की खुशी का सबसे खूबसूरत अंदाज़ यह है कि उस खुशी में दूसरे इंसानों को भी शामिल किया जाए। अस्पतालों में जाकर मरीजों का हाल पूछना, जरूरतमंदों की मदद करना और उनके दुख-दर्द में शरीक होना समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे को मज़बूत करता है।

मरीजों की सेवा और ज़रूरतमंदों की सहायता ही समाज की असली खिदमत हैं।हुज्जतुल इस्लाम मौलाना सैयद सफ़दर हुसैन ज़ैदी

आज जरूरत है कि हमारे नौजवान उलमा, सामाजिक कार्यकर्ता और संपन्न लोग इस तरह की सेवा गतिविधियों को बढ़ावा दें। जरूरतमंद मरीजों की सहायता, रक्तदान, गरीबों की मदद और बुजुर्गों की देखभाल जैसे कार्यों को धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का हिस्सा बनाया जाए।

हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा स.ल.व.व. और इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) की विलादत का पैगाम मोहब्बत, इंसानियत, सेवा और भाईचारे का पैगाम है। इस पैगाम को अमल के जरिए समाज तक पहुँचाना हम सभी की ज़िम्मेदारी है।

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