मंगलवार 1 सितंबर 2026 - 08:30
इमाम सादिक (अ) का जन्नत और जहन्नम में हमेशा रहने के कारण के बारे में महत्वपूर्ण सवाल का जवाब

इस्लामी शिक्षाओं की भाषा में ‘खुलूद’ का अर्थ लंबे समय तक बने रहना और हमेशा के लिए रहना है। कुरआन करीम में इसका इस्तेमाल जन्नत और जहन्नम में जाने वाले कुछ लोगों के हमेशा के भाग्य के बारे में किया गया है। खुलूद की अवधारणा को समझना क़यामत की हकीकत और इंसान के आखिरी जीवन की स्थिति को समझने के महत्वपूर्ण विषयों में से एक है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अहमद बिन मुहम्मद बिन खालिद बरक़ी की किताब ‘अल-महासिन’, जो शिया रिवायतों की किताबों में से है और ‘अल-काफी’ तथा ‘मन ला याहज़ुर अल फ़क़ीह’ के स्रोतों में शामिल है, उसमें जन्नत और जहन्नम में रहने वालों के हमेशा रहने के कारण के बारे में एक रिवायत आई है, जिसे पाठकों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।

इमाम सादिक (अ) ने फरमाया:

जहन्नम वाले लोग जहन्नम में हमेशा इसलिए रहेंगे कि दुनिया में उनकी नीयत यह थी कि अगर वे हमेशा दुनिया में जीवित रहें तो हमेशा अल्लाह की नाफरमानी करते रहें। और जन्नत वाले लोग जन्नत में हमेशा इसलिए रहेंगे कि दुनिया में उनकी नीयत यह थी कि अगर वे हमेशा दुनिया में रहें तो हमेशा अल्लाह की आज्ञा का पालन करते रहें। इसलिए दोनों समूहों को उनकी नीयतों के कारण हमेशा के लिए रखा गया। इसके बाद इमाम ने अल्लाह के इस कथन की तिलावत की: “قُلْ کُلٌّ یَعْمَلُ عَلی‌ شاکِلَتِهِ قَالَ عَلَی نِیَّتِهِ कह दीजिए, हर व्यक्ति अपनी नीयत के अनुसार कर्म करता है।”

अल-महासिन, पेज 331, हदीस 94

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