मंगलवार 4 अगस्त 2026 - 09:37
अरबईन में ज़ायरीन की शारीरिक ज़रूरतों के साथ-साथ धार्मिक मार्गदर्शन की भी व्यवस्था; स्तंभ संख्या 327 पर स्थापित कारवाने-ए-हिंद के मौक़िब में विशेष शरीयती केंद्र

नजफ़ अशरफ़ से कर्बला-ए-मुअल्ला जाने वाले मार्ग पर स्तंभ संख्या 327 पर स्थापित कारवाने-ए-हिंद के मौक़िब में अरबईन के ज़ायरीन की शारीरिक सेवा के साथ-साथ उनकी धार्मिक और शरीयती मार्गदर्शन के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। इस संबंध में हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अब्दुल्लाह आबिदी नजफ़ी ने हौज़ा न्यूज़ से विशेष बातचीत की।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, नजफ़ अशरफ़ से कर्बला-ए-मुअल्ला जाने वाले मार्ग पर स्तंभ संख्या 327 पर स्थित कारवाने-ए-हिंद के मौक़िब में जहाँ इमाम हुसैन (अ.) के ज़ायरीन के लिए भोजन, रहने की व्यवस्था, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सेवाओं का प्रबंध किया गया है, वहीं उनके धार्मिक, फ़िक़्ही और आस्थागत मार्गदर्शन के लिए मसाइल-ए-शरईया (धार्मिक प्रश्नों के उत्तर का विशेष केंद्र) भी स्थापित किया गया है। इस केंद्र में नजफ़ अशरफ़ के विद्वान उलेमा और तलबा ज़ायरीन के शरीयती सवालों के जवाब दे रहे हैं।
इस संबंध में हौज़ा न्यूज़ के प्रतिनिधि ने भारत से संबंध रखने वाले और नजफ़ अशरफ़ में निवासरत हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अब्दुल्लाह आबिदी नजफ़ी से विशेष बातचीत की।
मौलाना अब्दुल्लाह आबिदी नजफ़ी ने कहा कि अरबईन-ए-हुसैनी के इस महान आयोजन में लाखों ज़ायरीन हज़रत इमाम हुसैन (अ.) की ज़ियारत का सौभाग्य प्राप्त करने के लिए नजफ़ अशरफ़ से कर्बला-ए-मुअल्ला की ओर बढ़ रहे हैं। दुनिया भर, विशेष रूप से भारत, पाकिस्तान, इराक़, इस्लामी गणराज्य ईरान और अन्य देशों के हज़ारों मौक़िब दिन-रात ज़ायरीन की सेवा में लगे हुए हैं और उन्हें भोजन, आवास, चिकित्सा सुविधाएँ तथा अन्य आवश्यक सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ज़ायरीन की शारीरिक ज़रूरतों को पूरा करना आवश्यक है, उसी प्रकार उनकी आध्यात्मिक, फ़िक़्ही और आस्थागत मार्गदर्शन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से पिछले दस वर्षों से हौज़ा-ए-इल्मिया नजफ़ अशरफ़ की ओर से विभिन्न मौक़िबों में उलेमा और तलबा अरबी, फ़ारसी तथा अन्य भाषाओं में ज़ायरीन के शरीयती सवालों, इस्तिफ़्ताआत (धार्मिक प्रश्नों), फ़िक़्ही आदेशों और आस्था संबंधी प्रश्नों के उत्तर दे रहे हैं।
उन्होंने आगे बताया कि इस वर्ष पहली बार हौज़ा-ए-इल्मिया नजफ़ अशरफ़, पवित्र धार्मिक स्थलों के सहयोग और आयतुल्लाहिल उज़्मा सैय्यद अली हुसैनी सीस्तानी (दाम ज़िल्लुह) के मार्गदर्शन में भारत और पाकिस्तान के मौक़िबों में उर्दू भाषा में भी मसाइल-ए-शरईया के विशेष केंद्र स्थापित किए गए हैं। यहाँ नजफ़ अशरफ़ के विद्वान उलेमा और तलबा ज़ायरीन के शरीयती, फ़िक़्ही, आस्थागत और ऐतिहासिक सवालों के जवाब दे रहे हैं।
मौलाना अब्दुल्लाह आबिदी नजफ़ी ने कहा कि इससे पहले यह सेवाएँ अधिकतर अरबी, फ़ारसी और अन्य भाषाओं तक सीमित थीं। हर वर्ष नजफ़ अशरफ़ के हज़ारों उलेमा, शिक्षक और तलबा विभिन्न मौक़िबों में ज़ायरीन को धार्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उर्दू भाषा में इस सेवा की शुरुआत भारत और पाकिस्तान से आने वाले ज़ायरीन के लिए एक महत्वपूर्ण और स्वागत योग्य कदम है, जिससे वे अपनी भाषा में धार्मिक प्रश्नों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने अरबईन के ज़ायरीन से अपील करते हुए कहा कि जिस प्रकार वे मौक़िबों में अपनी शारीरिक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं, उसी प्रकार उन्हें चाहिए कि इन मसाइल-ए-शरईया केंद्रों से भी पूरा लाभ उठाएँ और इबादत, ज़ियारत, पवित्रता (तहारत), नमाज़, फ़िक़्ही आदेशों और अन्य धार्मिक विषयों से संबंधित अपने प्रश्न अवश्य पूछें, ताकि वे पूरी जानकारी और संतुष्टि के साथ अपने धार्मिक कार्यों को पूरा कर सकें।
उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला सभी ज़ायरीन-ए-इमाम हुसैन (अ.) की ज़ियारत को स्वीकार करे, उन्हें सही धार्मिक ज्ञान प्रदान करे और अरबईन-ए-हुसैनी के इस महान वैश्विक आयोजन को उम्मते मुस्लिमा की एकता, जागृति और अहले बैत (अ.) की पहचान के प्रसार का माध्यम बनाए।

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