शुक्रवार 21 अगस्त 2026 - 04:59
बहस और बेवजह मज़ाक से बचें

इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम ने एक हदीस में दूसरों के साथ संबंधों में इंसान के सम्मान और प्रतिष्ठा की रक्षा की ओर संकेत किया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार निम्नलिखित रिवायत “मुन्तख़ब मीज़ानुल हिकमत” किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः

امام حسن عسکری علیه‌السلام:

لَا تُمارِ فَیَذْهَبَ بَهَاؤُکَ، وَلَا تُمازِحْ فَیُجْتَرَأَ عَلَیْکَ.

इमाम हसन अस्करी (अ) ने फ़रमाया:

“बहस मत करो, वरना तुम्हारा सम्मान समाप्त हो जाएगा और मज़ाक मत करो, वरना लोग तुम्हारे साथ गुस्ताख़ी करने लगेंगे।”

मुन्तख़ब मीज़ानुल हिकमत, पेज 512

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