हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , आयतुल्लाह सैयद मुर्तज़ा मुस्तजाबी ने आयतुल्लाह हाज शेख हसन साफ़ीؒ की याद में उनके परहेज़गारी, अच्छे आचरण, त्याग और अद्भुत विनम्रता से जुड़ा एक वाक्या बताया।
उन्होंने कहा,जब मैं नजफ़ अशरफ़ में मदरसा-ए-आख़ुंद में रहता था, उस समय मरहूम आयतुल्लाह साफ़ी मदरसा-ए-बादकूबा में रहते थे। वे परहेज़गारी, अच्छे चरित्र, त्याग और उदारता में बहुत ऊँचे स्थान पर थे।
आयतुल्लाह मुस्तजाबी ने आगे बताया, आयतुल्लाह साफ़ी अक्सर रात के समय छात्रों के कपड़े, जैसे कमीज़ और पायजामा, धोकर रस्सी पर सुखा देते थे। सुबह जब कोई छात्र उठता तो देखता कि उसके बहुत गंदे कपड़े आयतुल्लाह साफ़ी ने धो दिए हैं।
उन्होंने कहा,जब छात्र उनसे इस बारे में पूछते तो वे कहते थे,मेरे लिए आपका सेवा करना एक ज़िम्मेदारी है, क्योंकि आप इमाम-ए-ज़माना (अ.ज.) के सैनिक हैं। अगर मैंने आपकी कोई सेवा की है तो इससे इमाम-ए-ज़माना (अ.ज.) खुश होंगे।
आयतुल्लाह मुस्तजाबी ने आयतुल्लाह हाज शेख हसन साफ़ीؒ के इल्मी मकाम के बारे में कहा कि वे फ़िक़्ह, उसूल और दूसरे इल्मी विषयों में बहुत गहरी जानकारी रखते थे। वे बेहद विनम्र और बहुत परहेज़गार थे। उन्होंने मेरे साथ भी बहुत प्यार और स्नेह का व्यवहार किया।
उन्होंने एक और वाकया बताते हुए कहा, एक बार इस्फ़हान में आयतुल्लाह साफ़ी ने मुझसे पूछा कि क्या मेरे पास मरहूम शहीद सद्रؒ की किताबें हैं? मैंने हाँ में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मुझे उन किताबों की ज़रूरत है। मैंने उसी दिन वे किताबें उन्हें दे दीं। कुछ दिनों बाद उन्होंने बताया कि इन किताबों को पढ़ने से उन्हें इल्मी और सोच के स्तर पर बहुत मदद मिली।
स्रोत: किताब “मुज्तहिदी पहलवान”, पृष्ठ 301-302
आपकी टिप्पणी