हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत ‘तनबीहुल ख़वातिर’ किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
امام علی علیهالسلام:
کَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّی اللَّهُ عَلَیْهِ وَآلِهِ لَا یُؤْثِرُ عَلَی الصَّلَاةِ عَشَاءً وَلَا غَیْرَهُ، وَکَانَ إِذَا دَخَلَ وَقْتُهَا کَأَنَّهُ لَا یَعْرِفُ أَهْلًا وَلَا حَمِیمًا.
इमाम अली (अ) ने फ़रमाया:
“रसूलुल्लाह (स) नमाज़ के ऊपर न तो रात के खाने को प्राथमिकता देते थे और न ही किसी दूसरी चीज़ को। जब नमाज़ का समय हो जाता था तो ऐसा लगता था जैसे वे न अपने परिवार को पहचानते हैं और न किसी घनिष्ठ मित्र को।”
तनबीहुल ख़वातिर, भाग 2, पेज 78
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