हौज़ा न्यूज़ एजेंसी
तफसीर; इत्रए क़ुरआन: तफसीर सूर ए बकरा
بسم الله الرحـــمن الرحــــیم बिस्मिल्लाह अल-रहमान अल-रहीम
إِلَّا الَّذِينَ تَابُوا وَأَصْلَحُوا وَبَيَّنُوا فَأُولَـٰئِكَ أَتُوبُ عَلَيْهِمْ ۚ وَأَنَا التَّوَّابُ الرَّحِيمُ इल लल्लज़ीना ताबू वा असलहू वा बय्यनू फ़उलाएका अतूबू अलैहिम वा अना अल तव्वाबुर रहीम। (बकरा 160)
अनुवादः किन्तु जिन्होंने (सच्चाई को छिपाने से) तौबा कर ली और स्वयं को सुधार लिया। और (सच्चाई) प्रकट की कि ये वे लोग हैं जिनकी तौबा क़ुबूल कर लूँगा (उन्हें माफ़ कर दूँगा) और मैं सबसे तौबा क़बूल करने वाला और अत्यन्त दयावान (दयालु) हूँ।
क़ुरआन की तफसीर:
1️⃣ धार्मिक तथ्यों को छुपाने वाले अगर तौबा करें तो अल्लाह की लानत से छुटकारा पा सकते हैं और उसकी रहमत के हक़दार हो सकते हैं।
2️⃣ पापों से पश्चाताप, उनके भ्रष्टाचारों और बुरे परिणामों को सुधारना, कटी हुई दया को फिर से स्थापित करने का कारण है।
3️⃣ लोगों को आसमानी पुस्तकों की शिक्षाओं और तथ्यों को समझने से रोकना और उन पर विश्वास करना कुप्रथा पैदा करना है।
4️⃣ पापियों पर अल्लाह का शाप उन्हें पश्चाताप करने के अवसर से वंचित करने का कारण नहीं है।
5️⃣ अल्लाह तआला गुनाहगारों की तौबा क़ुबूल करेगा अगर वो गुनाहों की तौबा कर लें।
6️⃣ अल्लाह की तौबा कुबूल करना उसकी रहमत का इजहार है।
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तफसीर राहनुमा, सूर ए बकरा
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