हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत ग़ेरर उल हिकम किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
امیرالمؤمنین علیهالسلام میفرمایند:
لاَ قِحَةَ کَالْبُهْتِ.
अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) ने फ़रमाया:
“तोहमत लगाने से बढ़कर कोई बेशर्मी और बेबाकी नहीं है।”
ग़ेरर उल हिकम, हदीस संख्या 4438
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