हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत ‘ग़ेरर उल हिकम’ किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
امیرالمؤمنین علیهالسلام میفرمایند:
إِنْ سَمَتْ هِمَّتُکَ لِإِصْلَاحِ النَّاسِ فَابْدَأْ بِنَفْسِکَ، فَإِنَّ تَعَاطِیَکَ إِصْلَاحَ غَیْرِکَ وَأَنْتَ فَاسِدٌ أَکْبَرُ الْعَیْبِ.
अमीरुल मोमिनीन हजरत अली (अ) ने फ़रमाया:
“यदि तुम लोगों का सुधार करना चाहते हो, तो इसकी शुरुआत स्वयं से करो। क्योंकि जब तुम स्वयं बिगड़े हुए हो और दूसरों को सुधारने में लगे हो, तो यह सबसे बड़ा दोष है।”
ग़ेरर उल हिकम, हदीस 3749।
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