हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हुसैन अंसारियान ने कहा कि इंसान केवल शरीर और भौतिक अस्तित्व का नाम नहीं है, बल्कि उसका एक आध्यात्मिक अस्तित्व भी है। इस आध्यात्मिक अस्तित्व का विकास ईश्वर की पहचान और ईश्वरीय शिक्षाओं पर अमल के माध्यम से होता है।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हुसैन अंसारियान ने तेहरान में सफ़र महीने के तीसरे अशरे की मजलिसों को संबोधित करते हुए कुरआन और अहले-बैत (अ.स.) की रिवायतों की रोशनी में इंसान के भौतिक और आध्यात्मिक अस्तित्व को समझाया।
उन्होंने कहा कि इंसान का भौतिक अस्तित्व मिट्टी से बना है और जन्म के बाद भी उसका जीवन भोजन तथा दूसरी भौतिक जरूरतों पर निर्भर रहता है। लेकिन अगर इंसान केवल अपने भौतिक अस्तित्व तक सीमित रह जाए और अपनी आध्यात्मिक वास्तविकता को नज़रअंदाज़ कर दे, तो कुरआन की दृष्टि में उसका दर्जा जानवरों जैसा हो जाता है, क्योंकि वह अपनी बुद्धि, आंखों और कानों का इस्तेमाल सत्य को समझने के लिए नहीं करता।
उन्होंने कहा कि पैगंबरों का भेजा जाना और आसमानी किताबों का अवतरण इस बात का प्रमाण है कि इंसान का अस्तित्व केवल भौतिक शरीर तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें एक आध्यात्मिक वास्तविकता भी मौजूद है। इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह, क़यामत, हलाल-हराम तथा नैतिक और व्यावहारिक आदेशों की जानकारी हासिल करे और फिर उन पर अमल करे।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अंसारियान ने ईमान, मारिफत, अमल और सब्र को आध्यात्मिक विकास के महत्वपूर्ण चरण बताया। उन्होंने कहा कि इंसान गुनाह और शैतानी वसवसों के बावजूद अपने ईमान की रक्षा कर सकता है।
अल्लाह ने आज्ञापालन और नेक अमल करने वालों के लिए अपनी रहमत, मग़फ़िरत, अपनी रज़ामंदी और जन्नत का वादा किया है। इसलिए इंसान को कभी भी अल्लाह की रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए।
उन्होंने आध्यात्मिक में माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि कुछ शिक्षक केवल शिक्षा नहीं देते, बल्कि विद्यार्थियों की धार्मिक और नैतिक तरबीयत भी करते हैं तथा उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मोमिन इंसान मुश्किलों में अल्लाह को अपना सहारा बनाता है। वह नमाज़, दुआ, तवस्सुल और ज़ियारत के माध्यम से अल्लाह से मदद मांगता है और इसी कारण उसे दिल का सुकून प्राप्त होता है। जैसा कि कुरआन में कहा गया है:सुन लो! अल्लाह के ज़िक्र से ही दिलों को सुकून मिलता है।
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अंसारियान ने चोरी के बारे में कहा कि इसे केवल किसी व्यक्ति का मोबाइल या घर का सामान चुराने तक सीमित नहीं किया जा सकता। किसी कौम, अनाथ या कमजोर व्यक्ति के माल पर नाजायज़ कब्ज़ा करना भी चोरी है। दुनिया में कभी-कभी राष्ट्रों के संसाधनों पर भी कब्ज़ा किया जाता है और ऐसे अत्याचारों का भी क़यामत के दिन हिसाब लिया जाएगा।
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