शुक्रवार 14 अगस्त 2026 - 10:05
गुनाह को केवल हराम नहीं, बल्कि ज़हर और गंदगी समझें; आयतुल्लाह जवादी आमोली

आयतुल्लाह जवाद आमोली ने नैतिकता के एक पाठ में इबादत के विभिन्न स्तरों और गुनाह के बारे में अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) की आध्यात्मिक और गहरी नसीहतों को बयान किया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाह जवाद आमोली ने नैतिकता के एक पाठ में इबादत के विभिन्न स्तरों और गुनाह के बारे में अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ) की आध्यात्मिक और गहरी नसीहतों को बयान किया।

उन्होंने कहा कि इबादत करने वाले तीन प्रकार के होते हैं। एक वे जो डर की वजह से अल्लाह की इबादत करते हैं, दूसरे वे जो जन्नत और ईश्वरीय पुरस्कार की आशा में इबादत करते हैं, जबकि तीसरे वे हैं जो शुक्र और अल्लाह तआला से मुलाकात के शौक में इबादत करते हैं। दुआओं में भी यही अंतर पाया जाता है; कुछ लोग जहन्नम से निजात, कुछ जन्नत और कुछ अल्लाह तआला की निकटता की दुआ करते हैं।

आयतुल्लाह जवाद आमोली ने कहा कि हज़रत अली (अ) कभी लोगों को आबिदाना, कभी ज़ाहिदाना और कभी आरिफाना अंदाज़ में नसीहत फरमाते थे। आरिफाना नसीहत में गुनाह को केवल हराम और जहन्नम का कारण नहीं बताया जाता, बल्कि उसे ऐसी हकीकत के रूप में पेश किया जाता है जिसकी आंतरिक वास्तविकता ज़हर और गंदगी है।

उन्होंने हज़रत अकील के वाकये की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब अकील ने बैतुलमाल से अतिरिक्त धन लेने का अनुरोध किया तो हज़रत अली (अ) ने गर्म लोहे के माध्यम से उन्हें यह एहसास दिलाया कि जब दुनिया की मामूली गर्मी बर्दाश्त नहीं होती, तो हराम माल के परिणामस्वरूप आख़िरत की आग कैसे बर्दाश्त होगी?

इसी तरह अशअस बिन कैस के रिश्वत के तौर पर हलवा लाने के वाकये में हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने उसे मिठाई नहीं बल्कि गंदगी करार दिया। आयतुल्लाह जवाद आमोली के अनुसार, यह आरिफाना नसीहत थी; यानी मामला केवल यह नहीं है कि रिश्वत हराम है, बल्कि इंसान को गुनाह की हकीकत को इस हद तक महसूस करना चाहिए कि वह उसे गंदगी समझकर उससे दूर रहे।

उन्होंने कहा कि इंसान को फ़िक़्ह के माध्यम से हलाल और हराम की पहचान, इबादत के माध्यम से बंदगी और ज़ुह्द के माध्यम से दुनिया से बेरुखी हासिल करनी चाहिए, लेकिन इससे ऊंचा दर्जा यह है कि इंसान की आंतरिक बसीरत जागृत हो जाए और वह गुनाह की बदबू तथा नेकी की खुशबू को महसूस करने के योग्य हो जाए।

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