बुधवार 12 अगस्त 2026 - 17:44
रसूले अकरम (स) की रेहलत का ग़म सभी मुसीबतों से बड़ा है: आयतुल्लाह जवाद आमोली

आयतुल्लाहिल अज़्मा जवाद आमोली ने अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम के कथन की रोशनी में रसूले अकरम (स) की रेहलत की अज़मत बयान करते हुए कहा है कि आपकी रेहलत उम्मत के लिए इतनी बड़ी मुसीबत थी कि उसके मुकाबले में बाकी सभी मुसीबतें मामूली और तुच्छ दिखाई देती हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाहिल अज़्मा जवाद आमोली ने अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम के कथन की रोशनी में रसूले अकरम (स) की रेहलत की अज़मत बयान करते हुए कहा है कि आपकी रेहलत उम्मत के लिए ऐसी अज़ीम मुसीबत थी कि उसके मुकाबले में अन्य सभी मुसीबतें मामूली और तुच्छ दिखाई देती हैं।

आयतुल्लाहिल अज़्मा जवाद आमोली ने अपने एक संबोधन में रसूले अकरम (स) की रेहलत के अज़ीम सदमे के बारे में अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अलैहिस्सलाम के कथनों की व्याख्या करते हुए कहा कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने रसूले ख़ुदा (स) की मुसीबत को सभी मुसीबतों से अज़ीम बताया है।

उन्होंने अमीरुल मोमिनीन अलैहिस्सलाम के इस कथन की ओर संकेत किया:

«وَإِنَّ الْمُصَابَ بِکَ لَجَلِیلٌ، وَإِنَّهُ قَبْلَکَ وَبَعْدَکَ لَجَلَلٌ»

अर्थात: आपकी रेहलत का सदमा अत्यंत अज़ीम और असहनीय है, जबकि आपकी रेहलत से पहले और उसके बाद आने वाली अन्य मुसीबतें इसके मुकाबले में मामूली हैं।

आयतुल्लाह जवाद आमोली ने स्पष्ट किया कि यहाँ «जलील» से आशय अज़ीम और बहुत बड़ी मुसीबत है, जबकि «जलल» के अर्थ मामूली और तुच्छ के हैं। अतः अमीरुल मोमिनीन अलैहिस्सलाम के अनुसार रसूले अकरम (स) की रेहलत ऐसी अजीम मुसीबत है कि उसके मुकाबले में बाकी सभी मुसीबतें मामूली महसूस होती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि अमीरुल मोमिनीन अलैहिस्सलाम ने एक अन्य स्थान पर रसूले ख़ुदा (स) की रेहलत के बारे में फरमाया:

«لَقَدْ خَصَّصْتَ حَتَّی صِرْتَ مُسَلِّیًا عَمَّنْ سِوَاکَ، وَعَمَّمْتَ حَتَّی صَارَ النَّاسُ فِیکَ سَوَاءً»

अर्थात: आपकी मुसीबत इतनी अनोखी और अज़ीम है कि दूसरी सभी मुसीबतों के मुकाबले में आपकी याद इंसान के लिए तसल्ली का कारण बन जाती है। कोई भी मुसीबत आपकी रेहलत के बराबर नहीं है और आपके विसाल के बाद आने वाली परेशानियों को भी इसी अज़ीम सदमे के मुकाबले में सहन किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि अमीरुल मोमिनीन अलैहिस्सलाम के ये कथन रसूले अकरम (स) की रेहलत के अज़ीम आध्यात्मिक और सामाजिक प्रभावों को स्पष्ट करते हैं।

संदर्भ:

1-नहजुल बलाग़ा, हिकमत 292

2- नहजुल बलाग़ा, ख़ुत्बा 235

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