हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत तंबीहुल ख़वातिर किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
قال الامام الصادق علیہ السلام:
مَنْ عَیَّرَ أَخَاهُ بِذَنْبٍ قَدْ تَابَ مِنْهُ لَمْ یَمُتْ حَتَّی یَعْمَلَهُ.
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने फ़रमाया:
"जो व्यक्ति अपने मोमिन भाई को उस गुनाह पर मलामत करे, जिससे वह तौबा कर चुका है, तो वह उस समय तक नहीं मरेगा, जब तक स्वयं उसी गुनाह को न कर ले।"
तंबीहुल ख़वातिर, भाग 1, पेज 113
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