गुरुवार 13 अगस्त 2026 - 05:07
दूसरों को तौबा के बाद सरज़निश करने का परिणाम

इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम ने एक रिवायत में किसी मोमिन को उसके तौबा कर लेने के बाद भी उसके गुनाह पर मलामत करने के परिणाम की ओर संकेत किया है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत तंबीहुल ख़वातिर किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः

قال الامام الصادق علیہ السلام:

مَنْ عَیَّرَ أَخَاهُ بِذَنْبٍ قَدْ تَابَ مِنْهُ لَمْ یَمُتْ حَتَّی یَعْمَلَهُ.

इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने फ़रमाया:

"जो व्यक्ति अपने मोमिन भाई को उस गुनाह पर मलामत करे, जिससे वह तौबा कर चुका है, तो वह उस समय तक नहीं मरेगा, जब तक स्वयं उसी गुनाह को न कर ले।"

तंबीहुल ख़वातिर, भाग 1, पेज 113

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